पारो शैवलिनी की रपट
चित्तरंजन: रेलनगरी के एरिया-चार स्थित श्री लता इन्स्टीट्यूट में चल रहे पुस्तक मेला के दूसरे दिन आयोजित काव्य संध्या में अपनी स्वरचित कविता का पाठ के दौरान चिरेका कर्मी संजीव सिंह ने कहा कि हमारे एकाकी जीवन का एकमात्र सच्चा दोस्त अगर कोई है तो वो है पुस्तक। एक सच्चा दोस्त की तरह वो हमें सच्ची और अच्छी बातों से अवगत कराता रहता है।ये अलग बात है कि आप कैसी और कौन सी किताब पढ़ना पसंद करते हैं। काव्य संध्या में संजीव सिंह के साथ राजेश कुमार,कल्याण मुखर्जी,मोहम्मद आलम, मेराज अहमद मेराज,ऐश्वर्या सेन,शरतचंद्र महतो ने स्वरचित कविताओ का पाठ किया। तदोपरान्त,सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी सामूहिक परम्पारिक नृत्य के आयोजन में कलाकारों ने सैकड़ों की संख्या में मौजूद दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीलता इन्स्टीट्यूट के ऑटोटोरियम में लगभग सभी स्टालो पर बंगला और अंग्रेजी की पुस्तक ही मिल रही थी।कई हिन्दी भाषियों को हिन्दी पुस्तक नहीं मिलने की वजह से निराशा मिली।वहीं एकमात्र आजकेर जोधन स्टाल पर हिन्दी की मात्र दो पुस्तक क्या यही सच है और ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जीवनी उपलब्ध थी जिसे पत्रकार पारो शैवलिनी ने खरीदा और इस बात पर आक्रोश जताया कि चित्तरंजन रेलनगरी में आज भी हिन्दी भाषियों की बाहुलता है बावजूद यहाँ हिन्दी की किताबें नहीं मिल रही है,ऐसे में अगर यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अपने आप में श्रीलता इन्स्टीट्यूट का यह आयोजन पुरी तरह सफल नहीं है।